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अगर आप लोगों का न्याय करते हैं तो आपके पास उन्हे प्यार करने का समय नहीं होगा । "दूसरों का न्याय मत करो और तुम्हारा भी न्याय नहीं किया जाएगा" । (मत्ती 7: 1)

मसीह से पहले लोगों ने धुंधले आईने में छाया की तरह परमेश्वर को ठीक से नहीं समझा । लेकिन मसीह में परमेश्वर खुद हमारे पास आये ताकि हम साफ साफ समझ सकें कि वह कौन है। “पिता और मैं एक >>>

परमेश्वर लोगों को बीमार नहीं करता क्योंकि उसकी उपस्तिथि चंगा करती है “परमेश्वर दुष्ट की परीक्षा में नहीं पड़ सकता”। (याकूब 1: 13)

तुम्हारी उपस्तिथि में बीमार चंगे हो जाते हैं, पापी पवित्र हो जाते हैं और अंधे देखने लगते हैं। तुम्हारी उपस्तिथि निराश लोगों के लिए आशा, और दबे हुए लोगों के लिए स्वतंत्रता लाती है। तुम्हारी उपस्तिथि के सामने पहाड़ मोम >>>

आपके विचारों मे ताकत है। आपके शब्दों मे अद्भुत शक्ति है। इसलिए सावधान रहिए कि आप क्या सोचते है औऱ क्या बोलते हैं? "जीभ के वश मे मृत्यु औऱ जीवन दोनों हैं"। (नीतिवचन 18: 21)

आपके शब्द आपके जीवन को निर्देशित करते हैं आज आप जिस चीज़ के बारे में बात करते हैं कल वो आपके पास होगा। परमेश्वर ने सृष्टि को अपने शब्द से बनाया। शब्द में रचनात्मक शक्ती है। आप निश्चय करते हैं >>>