दिल से दिल तक

Who Is Jesus?

उसका जन्म 2000 साल पहले एक बढ़ई के बेटे के रूप में बैतलैहम नामक एक छोटे शहर में हुआ था। उस समय बहुत से लोगों ने उसके जन्म पर ध्यान नहीं दिया। फिर भी अभी हम पूरे इतिहास को दो >>>

दया संसार को चलाती है। "परमेश्वर उपकार न माननेवालों और धूर्तों के प्रति दयालु हैं"। (लुका 6: 35)

दयालुता को हराना नामुमकिन है। ठीक जैसे अंधकार रोशनी पर नहीं जीत सकता और जैसे आग समुद्र को नहीं जला सकती और रात दिन को नहीं रोक सकती उसी तरह से दयालूता अजय है।

अगर तुम दयालुता को दुःख पहुँचाओगे >>>

तुम प्रेम के लिए बनाए गए थे। “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना इकलौता पुत्र दे दिया ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो परंतु अनंत जीवन पाए"। (यूहन्ना 3: 16)

जीवन एक फैसला है। तुम्हारा जीवन एक फैसले के कारण शुरू हुआ, पर वह फैसला तुम्हारा नहीं था। तुमने फैसला नहीं लिया कि तुम्हें इस दुनिया में आने की ज़रूरत है।

जीवन बढ़ोतरी है। बढ़ोतरी विरासत में मिले फ़ैसलों से >>>

परमेश्वर लोगों को बीमार नहीं करता क्योंकि उसकी उपस्तिथि चंगा करती है “परमेश्वर दुष्ट की परीक्षा में नहीं पड़ सकता”। (याकूब 1: 13)

तुम्हारी उपस्तिथि में बीमार चंगे हो जाते हैं, पापी पवित्र हो जाते हैं और अंधे देखने लगते हैं। तुम्हारी उपस्तिथि निराश लोगों के लिए आशा, और दबे हुए लोगों के लिए स्वतंत्रता लाती है। तुम्हारी उपस्तिथि के सामने पहाड़ मोम >>>

अगर आपको चमत्कार चाहिए तो उसके लिए आपको परमेश्वर की जरूरत है। लेकिन परमेश्वर को आपके जीवन मे चमत्कार करने के लिए, आपके विश्वास की आवश्यकता है। "विश्वास करने वालो के लिए सब कुछ सम्भव है"। (मरकुस 9: 23)

धन्यवाद के परिणाम स्वरूप हमारा विश्वास और मज़बूत होता है। जब हम विश्वास से परमेश्वर को उसके भावी जवाबों के लिए धन्यवाद देते हैं तब हमारा विश्वास और मज़बूत होता है। हालाकि हम उसके जवाब को अभी तक अपनी शारीरिक >>>

आपके विचारों मे ताकत है। आपके शब्दों मे अद्भुत शक्ति है। इसलिए सावधान रहिए कि आप क्या सोचते है औऱ क्या बोलते हैं? "जीभ के वश मे मृत्यु औऱ जीवन दोनों हैं"। (नीतिवचन 18: 21)

आपके शब्द आपके जीवन को निर्देशित करते हैं आज आप जिस चीज़ के बारे में बात करते हैं कल वो आपके पास होगा। परमेश्वर ने सृष्टि को अपने शब्द से बनाया। शब्द में रचनात्मक शक्ती है। आप निश्चय करते हैं >>>

अपनी समस्याओं पर मन ना लगाऐ, परमेश्वर पर मन लगाए जो हर समस्या का समाधान कर सकता है। "विश्वास करने वालो के लिए सब कुछ सम्भव है"। (मरकुस 9: 23)

हमारा ध्यान हमारी दिशा को निश्चित करता है। पीछे देखकर आगे की ओर जाने की कोशिश करना नामुमकिन है। हार के बारे में सोचकर जीतने की कोशिश करना नामुमकिन है। हमारा ध्यान दिखाता है की हम कहाँ जा रहे हैं। >>>