अगर आप लोगों का न्याय करते हैं तो आपके पास उन्हे प्यार करने का समय नहीं होगा । “दूसरों का न्याय मत करो और तुम्हारा भी न्याय नहीं किया जाएगा” । (मत्ती 7: 1)

मसीह से पहले लोगों ने धुंधले आईने में छाया की तरह परमेश्वर को ठीक से नहीं समझा । लेकिन मसीह में परमेश्वर खुद हमारे पास आये ताकि हम साफ साफ समझ सकें कि वह कौन है। “पिता और मैं एक हैं जिस किसी ने मुझे देख लिया उसने पिता को देख लिया, “- यीशु ने पृथ्वी पर अपने आने के उद्देश्य की घोषणा की। (यूहन्ना 10: 30,14: 9)

इसलिए परमेश्वर ने हमें चार सुसमाचार दिए ताकि हम ध्यान से पढ़ सकें कि यीशु कौन था, उसका चरित्र कैसा था और वह क्या कर रहा था। मसीह में सृष्टिकर्ता ने इंसान का रूप लिया और हमारे पास आया। अगर आप जानना चाहते हैं कि परमेश्वर किस की तरह है – यीशु को देखो । यीशु ने जो कुछ किया, परमेश्वर भी वही कर रहा है। और जो कुछ उसने नहीं किया, परमेश्वर उसे नहीं कर रहा है।

यीशु मसीह के अद्भूत गुणों में से एक गुण जो हम सुसमाचार में लिखा हुआ देखते हैं, उसकी दया और करुणा थी। यीशु लोगों की विनती का उत्तर दे रहा था और उनके लिए अपनी योजनाओं को भी बदल देता था। यीशु की माँ यीशु के पास विवाह के भोज में दाखरस के घटने का विषय लेकर आई। यीशु ने उसे स्पष्ट बताया कि वह इस समस्या के बारे में कुछ नहीं करेगा। लेकिन उसने ऐसे दिखाया कि उसने उसे नहीं सुना और वास्तव में, उसे एक चमत्कार करने के लिए विवश किया।

यीशु लोगों के लिए उत्तरदायी था, उस ने उन्हें खुद में हेर फ़ेर करने दिया, और वह उनकी गलतियों के प्रति अनुग्रहकारी और धीरजवन्त था। वह दयालू था और लोग उससे प्यार करते थे। पुराने नियम में परमेश्वर ने घोषणा की कि वह करुणामय और अनुग्रहकारी परमेश्वर है, क्रोध में धीमा और प्रेम मे भरपूर है। (निर्गमन 34: 6) नए नियम में यीशु ने हम पर परमेश्वर के प्रेम को प्रकट किया। उसके प्रेम की पूरी सामर्थ्य क्रूस पर प्रकट हुई जब यीशु ने उनके लिए प्रार्थना की जो उसे क्रूस पर चढ़ा रहे थे।

मैं चाहता हूं कि सारे इंसान विश्वासी बनें, और सारे विश्वासी इंसान बनें। लोग अपनी कमियों को अपने धार्मिक ओढने के पीछे छिपाते हैं, जो उन्हें परमेश्वर के प्रेम की बदलने वाली शक्ति की पहुंच से बाहर कर देते हैं। ये धार्मिक ओढने लोगों को देखने में ठीक दिखाते हैं लेकिन ये उन्हें बेरहम और क्रूर बनाते हैं।

न्याय प्रेम के रास्ते में आ जाता है “परमेश्वर मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि मैं दूसरे लोगों की तरह नहीं हूँ…” (लूका 18: 11) लेकिन इस तरह की सोच वाले लोगों से यीशु ने कहा, “कि तुम में से वह उस पर पहला पत्थर मारे जिसने पाप न किया हो।” (यूहन्ना 8: 7) और उस औरत से, जो इस तरह के लोगों के विचार से मृत्यु की हकदार थी, उसने साधारण तरीके से कहा,” मैं भी तुम्हें दोषी नहीं ठहराता। अब जाओ और अपना पापी जीवन छोड़ दो।” (यूहन्ना 8: 11)

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